सत्य की खोज में

Wednesday, June 16, 2010

डिस्ट्रिक्ट गवर्नर लायन पुष्पा स्वरुप से विशेष मुलाकात

 महिलाएं पुरषों का विरोध करके नहीं, उनका सहयोग लेकर  सशक्त  बनें - लायन पुष्पा स्वरुप

लायन्स क्लब्स इन्टरनेशनल में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के पद पर अभी तक हिन्दुस्तान  से चार-छह महिलाएं ही चुनी गयीं हैं, इनमें से एक श्रीमती पुष्पा स्वरुप हैं जिनका चुनाव इस पद के लिए गत माह निर्विरोध हुआ | श्रीमती स्वरुप केवल इसीलिए विशिष्ट नहीं हैं, उन्होंने वर्ष 1989 में लायन्स इलाहाबाद ईव्स के नाम से केवल महिलाओं के लिए एक क्लब की स्थापना की जो हिन्दुस्तान की पहली एवं एकमात्र महिला लायन्स क्लब है  जो आज भी कार्य कर रही हैं | श्रीमती स्वरुप के ससुर श्री जगदीश स्वरुप सोलीसिटर जनरल आफ़ इन्डिया रह चुके हैं | चर्चित लेखक विकास  स्वरुप इनके भतीजे हैं जिनकी बेस्ट सेलर पुस्तक 'क्यू एंड ए' पर आस्कर पुरस्कृत  फिल्म "स्लमडाग मिलिनियर" बनी जो पिछले साल काफी सुर्ख़ियों में रही | श्रीमती स्वरुप ने कई इतिहास रचे हैं और उनकी मुहिम  अभी जारी  है | यहाँ प्रस्तुत है उनसे जार्जटाउन, इलाहाबाद स्थित उनके आवास पर हुई लम्बी बातचीत के प्रमुख अंश -

प्रश्न - आप एक महिला होकर लायन्स क्लब के वाईस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के पद तक पहुँची हैं तो इस सफलता के लिए आपने क्या प्रयास किये ? आपकी इस सफलता का क्या रहस्य है ?

उत्तर - मैं आपको बताना चाहुँगी कि मुझसे पहले और कई डिस्ट्रिक्ट में महिलाएं गवर्नर हो चुकी हैं लेकिन अभी  तक हमारे डिस्ट्रिक्ट ( 321 ई ) में कोई महिला गवर्नर नहीं हुई थीं | लेकिन इस बार हमारे मण्डल के    पदाधिकारियों ने यह निर्णय लिया कि किसी महिला को गवर्नर बनाया जाये | और मैं अपने इस क्लब से डिस्ट्रिक्ट में सबसे सीनियर थी | मेरी योग्यता और काम  करने की ललक को देखते हुए उन्होंने मुझे 17 मई 2010 को वाराणसी में हुए इस चुनाव में निर्विरोध निर्वाचित कराया | हमारे डिस्ट्रिक्ट में पहली बार ये इतिहास रचा गया | इसमें पुरुष लायन्स का बहुत सहयोग रहा जिनमें इन्टरनेशनल डायरेक्टर लायन जगदीश गुलाठी, पीडीजी मंगल सोनी आदि सम्मानित पदाधिकारी एवं लायन मेम्बर शामिल हैं |

प्रश्न - आप अपने और अपने परिवार के बारे में कुछ बताइए ?

उत्तर - मेरे ससुर श्री जगदीश स्वरुप जी भारत के सोलीसिटर जनरल रह चुके हैं और एक सीनियर एडवोकेट भी | हमारे घर में सभी एडवोकेट हैं | मेरे ज्येठ-जिठानी, पति और मैं भी | मगर बच्चे सर्विस में हैं | हमारा परिवार एक सम्मानित परिवार है |  पहले मैं भी वकालत करती थी | मैंने लायन क्लब वर्ष 1978-79 में ज्वाइन किया | तब से इसके सेवाकार्य में लगी हूँ | जब मैं लायन क्लब में आई, उस समय महिला लायन नहीं होती थीं | 1987 में सुप्रीम कोर्ट अमेरिका ने निर्णय दिया कि जब महिलाएं भी सेवा कार्य करती हैं तो वे भी क्यों लायन नहीं हो सकती , उन्हें वोट देने का अधिकार क्यों न दिया जाये, क्यों गवर्नर नहीं हो सकती | और तब से ही महिलाएं भी लायन होने लगीं, उन्हें भी अधिकार मिल गये |
मैंने इलाहाबाद में वर्ष 1989 में 40 महिलाओं के साथ सिर्फ महिलाओं के लिए लायन्स क्लब खोला था | हम सबसे ज्यादा सेवा कार्य करते थे | हाँ मुझे  इस मुकाम तक पहुँचने में काफी टाइम लगा लेकिन मुझे ख़ुशी  है कि मेरा चयन इन लोगों ने किया | पहले लोग स्वीकार नहीं करते थे कि एक महिला इस तरह के किसी पद पर जाये लेकिन अब समय बदल रहा है | और मेरा भी, गवर्नर से पहले सभी पदों पर हमेशा अच्छा काम रहा है जिसके लिए कई बेस्ट अवार्ड  भी  मिलते रहे और मैंने सेवा कार्य भी बहुत किया | बेली हास्पिटल में मरीजों के लिए एक कमरा बनवाया जिसमें मेरे तक़रीबन 2 लाख रुपये खर्च हुए | इस तरह से मेरी सेवा को देखते हुए और मेरे काम  को देखते हुए शायद इन लोगों ने सोचा होगा कि पुष्पा स्वरुप को गवर्नर बनाया जाना चाहिए और मुझे ख़ुशी है  कि मेरा निर्विरोध चयन हुआ |

प्रश्न - आपका क्या मानना है कि आपको जो यह सफलता मिली है यह सिर्फ आपकी मेहनत का नतीजा है या इसमें किस्मत जैसी भी किसी चीज की भूमिका रही है ?

उत्तर -  मैंने हर पोस्ट-क्लब प्रेसीडेंट, जोन चेयरपर्सन इत्यादि में हमेशा बेस्ट परफार्मेन्स दी  है और बेस्ट लायन के आवार्ड जीते हैं, तो मेहनत व क़ाबलियत तो थी ही | वैसे महिलाएं तो और भी थीं | यहाँ तक पहुँचने में मुझे 10 साल लग गये | बाकी मैं यह मानती हूँ कि मैं इस पोस्ट की  उम्मींद अभी नहीं कर रही थी, तो एक चमत्कार भी है | मुझे पता भी  नहीं था, मुझे मुंबई से बुलाया गया, एक तरह से मुझे आफ़र किया गया तो किस्मत भी है | बगैर किस्मत के भी कुछ नहीं होता | बहुत सारे काबिल और मेहनती लोगों को कभी - कभी कुछ नहीं मिल पाता, तो मेहनत और काबिलियत के साथ किस्मत भी थी |

प्रश्न - महिला क्लब कितने होंगे हिन्दुस्तान में ?

उत्तर - हिन्दुस्तान में पहला महिला क्लब तो मेरा ही था, बाद में पंजाब और दिल्ली में भी खुले | लेकिन इस समय महिला क्लब मेरा ही रह गया है  क्योंकि बाकी क्लबों में धीरे-धीरे पुरूष आ गये हैं, लेकिन मेरा क्लब अभी भी सिर्फ महिलाओं के लिए ही है | हम दिखाना चाहते हैं कि महिलाएं भी वे सब काम कर सकती हैं जो पुरूष कर सकते हैं |

प्रश्न - आपने अपने क्लब में पुरूषों पर प्रतिबन्ध क्यों लगा रखा हैं ?

उत्तर - (हँसते हुए) हमारा उददेश्य था कि महिलाओं को आगे लायें | फिर दूसरा यह कि कुछ महिलाएं पुरूषों के साथ काम करने में असहज महसूस  करती हैं तो मैंने यह निर्णय किया था कि एक समानता रखी जाये क्लब में, या तो सभी महिलाओं के पारिवारिक सदस्यों को क्लब मेम्बर बनाया जाए या फिर किसी को भी नहीं, केवल महिलाएं रहें | इसलिए सिर्फ महिलाओं को ही साथ रखा और लगातार, हर काम में यह दिखा दिया कि हम भी, हर एक सेवा में, किसी से कम नहीं हैं और मेरा क्लब इतने दिनों से सफलतापूर्वक चल रहा है और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियाँ निभा रहा है |

प्रश्न -  अभी इस क्लब में कितनी महिलाएं सदस्य हैं ?

उत्तर - 40 शुरू किया था, संख्या 60 तक भी पहुँची लेकिन वर्तमान में 36 हैं |

प्रश्न - किस कारण से संख्या 60 तक पहुँचने के बाद आज 36 रह गयी हैं ?

उत्तर -  संख्यायें बढती-घटती रहती हैं, कभी किसी का स्थानान्तरण हो गया या कोई कहीं और चला गया | इस तरह भौतिक समस्यायों की वजह से, अन्य कोई खास कारण नहीं है | हमारे क्लब की प्रतिष्ठा  बहुत अच्छी है |

प्रश्न - किस प्रकार की महिलाएं आपके क्लब की सदस्य हैं ?

उत्तर - ज्यादातर कामकाजी महिलाएं हैं जो सर्विस करती हैं उनमे भी टीचरों की संख्या ज्यादा है, एडवोकेट भी हैं | कुछ गृहणियां भी हैं |

प्रश्न -  इस जिले में आपके क्लब का स्थान क्या है ? आप क्या मानती हैं ?

उत्तर  - मेरे इस जिले (321 ई ) में इलाहाबाद के अतिरिकत आस-पास के वाराणसी,गोरखपुर, आजमगढ़,  जौनपुर,  सुल्तानपुर, भदोही, सोनभद्र, बलिया, बस्ती, प्रतापगढ़ आदि 23 जनपद हैं जिनमें कुल 72 क्लब हैं | जिनमें मेरे क्लब का स्थान बहुत ही अच्छा है | हर साल मेरा क्लब मल्टीपिल से, डिस्ट्रिक्ट से, अवार्ड  पाता है, इन्टरनेशनल से अवार्ड पाता है | काम भी हमेशा हमारा अच्छा रहता है | हाँ आगे मैं यह चाहती हूँ कि एक परमानेंट प्रोजेक्ट मेरे क्लब का हो जाए, जैसे चल रहा है हमारा कौडिहार गाँव मूसेपुर में | हम वस्त्र देतें हैं, दवाएं देते हैं | आपरेशन करते हैं जिसका इलाज गाँव में नहीं हो पाता उन्हें यहाँ अस्पताल में ले आते हैं | उनका कोई खर्च नहीं होता | सारा खर्च हमारा क्लब वहन करता है |

प्रश्न - आपका क्लब, इलाहाबाद के अन्य क्लबों से किन मायनों में भिन्न है ?

उत्तर -  हमारा क्लब काफी पुराना है और दूसरा हमारे क्लब का मुख्य उददेश्य महिलाओं का सशक्तिकरण है | महिलाओं को बढ़ावा देना, उन्हें आत्मनिर्भर बनाना, ये हम करते हैं | इसके अलावा प्रौढ़ शिक्षा आदि भी है | आगे हमारी इच्छा हँ कि भविष्य में हम किसी गाँव में 4-5 कमरों का हास्पिटल, शिक्षा के लिए स्कूल इत्यादि का कुछ निर्माण कराएँ, ये हमारी योजनाओं   में है |

प्रश्न - आम लोगों की राय है कि क्लब  लोगों के शौक पूरा करने का साधन हैं, यह सामाजिक कार्यों का मात्र दिखावा करते हैं, आपका क्या मानना है ?

उत्तर - नहीं, ऐसा बिलकुल नहीं है | इक्का-दुक्का क्लबों की मैं बात नहीं करती वरना ऐसा नहीं है | आप देखिये लायन्स क्लब क्या क्या काम करता है और यही नहीं पूरे विश्व में करता है | और इसके बहुत बेहतरीन काम है | पूरी दुनिया में जहाँ भी प्राकृतिक आपदाएं आती हैं, वहाँ हमारे लायन्स क्लब इन्टरनेशनल के सदस्य पहुँच कर सेवा कार्य करते हैं | कुछ लोगों की वजह से आप सभी को दोष नहीं दे सकते | यूँ तो दुनिया में बहुत सारे संगठन हैं लेकिन उन सभी में लायन्स क्लब सबसे बड़ा है | जो लगभग 205 देशों में फैला हुआ है और जिसमें लगभग 14 लाख सदस्य हैं | यह क्लब सिर्फ आकार में ही नहीं बल्कि सेवाकार्य में भी सबसे आगे है |

प्रश्न -  लायन्स क्लब गठित करने का उददेश्य क्या है और किन कामों में यह सक्रिय है ?

उत्तर - सन 1917 में शिकागो के एक बिज़नेसमैन् मेल्विन जोन्स ने खाली  समय में जरूरतमंदों की मदद के उददेश्य से अमेरिका में स्थापित किया था | मेल्विन जोंस ने अपने साथियों से निवेदन किया कि कैसा रहे, यदि हम लोग, जो अपने क्षेत्र में सफल है, अपनी बुद्धिमत्ता और महत्त्वाकांक्षा से, अपनी योग्यताओं का उपयोग करे अपने समुदाय को उठाने में |  उनका मानना था कि आप बगैर दूसरो के लिए कुछ किये, ज्यादा आगे नहीं जा सकते | और उनका यह वक्तव्य आज भी दूसरे लायन्स को सामुदायिक महत्त्व की याद दिलाती हैं | उन्होंने इसे 6-7 लोगों के साथ शुरू किया था लेकिन आज ये पूरे विश्व में (205 देशो में, 14 लाख सदस्य ) फैला हुआ है | इसका सूत्र वाक्य है - "हम सेवा करते हैं" | इसकी मुख्य योजनाओं में दृश्य संरक्षण, श्रव्य संरक्षण,  विकलांगों,  अन्धों की सहायता करना, मोतियाबिन्द के आपरेशन कराना,  ब्लड  डोनेशन, प्रौढ़ शिक्षा, डायबिटीज़ आदि के बारे में जागरूकता देना, अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध एवं पर्यावरण संरक्षण  के महत्त्वो का प्रचार आदि हैं | जिन्हें लायन्स क्लब इंटरनेशनल हमारे ही भेजे गये फंड की मदद से पूरा करता है |

प्रश्न - अभी तो आप  सेकेण्ड वाईस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर चुनी गयी हैं जब आप पूरी तरह से गवर्नर बन जाएँगी तब आपकी प्राथमिकताएँ और योजनाएं  क्या होंगी ?

उत्तर -  मेरी समझ से गाँवों में हास्पिटल खोलने चाहिए | मैं जमीन  भी ढूंढ रही हूँ और इसे जरूर करूंगी | यह मेरी पहली योजना है | इसके अतिरिक्त जो भी क्लब कमजोर हैं उन्हें मज़बूत करने की कोशिश करुँगी | अभी तो यही है आगे जैसे - जैसे सीखती जाऊंगी, योजनाएं भी बनती जाएँगी |

प्रश्न - क्या आप इन्टरनेशनल प्रेसीडेंट, डायरेक्टर अथवा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को कोई सुझाव देना चाहेंगी ?

उत्तर-  जी, मैं चाहूँगी कि लायन्स को बढ़ने के लिए गाँवों की तरफ ध्यान दें | लोगों को लायन्स के बारे में बताएं कि लायन्स क्या करता है, कैसे वे इसके फायदे उठा सकते हैं | कुछ इस तरह की पब्लिसिटी पर जोर दें | और मैं समय-समय पर सुझाव देती भी रहती हूँ |
सुझावों  के अनुसार डायरेक्टर व गवर्नर नीतियाँ बनाते रहते हैं और बदलते रहते हैं | उदहारण के तौर पर पहले केवल डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की पोस्ट थी | उसके बाद वाईस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की पोस्ट बनी और अब सेकेण्ड वाईस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की पोस्ट भी बन गयी |  जिससे वे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के मार्गदर्शन में रहते हुए अपनी जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से पूरा करने का प्रशिक्षण ले सकें |

प्रश्न -  क्या आप इन्टरनेशनल स्तर पर भी किसी पद को पाने की महत्वाकांक्षा रखती हैं ?

उत्तर -  जी हाँ, ऐसा सपना तो सभी का हमेशा ही रहता है | देखिये हमारे यहाँ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के बाद मल्टीपिल काउंसिल चेयरपर्सन बनते हैं और उसके बाद इन्टरनेशनल डायरेक्टर | सपना तो है ही मेरा भी | मेहनत कर रही हूँ, और किस्मत साथ दे दे, तो बिलकुल बनना चाहती हूँ |

प्रश्न -  इन्टरनेशनल प्रेसीडेंट कभी कोई भारतीय महिला हुई है या नहीं ?

उत्तर -  नहीं, इन्टरनेशनल प्रेसीडेंट तो नहीं लेकिन महिलाएं इन्टरनेशनल डायरेक्टर हुई हैं लेकिन वे भी विदेशी | भारत से कुछ महिलाएं डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जरूर बनी हैं, और अब मैं भी उनमें जुड़ गयी हूँ |

बातचीत के दौरान साथ में बैठे है लायन डा. आर के श्रीवास्तव 

प्रश्न -  आपने किस उददेश्य से लायन्स क्लब को ज्वाइन किया था ?

उत्तर - उददेश्य तो केवल सेवा ही था | सेवा करती भी रही, जैसा कि मैंने पहले भी बताया कि बेली हास्पिटल में एक कमरा बनवाया, इसी तरह से हास्पिटलों में ए.सी., वाटर कूलर और कई मशीनें भी लगवाईं | इस तरीके के छोटे मोटे बहुत से काम किये | लायन्स क्लब में नई चीजें सीखने का अवसर मिलता है | सेवा कार्य को अधिक से अधिक व बेहतर ढंग से करने के प्रशिक्षण व अवसर मिलते हैं |

प्रश्न - आपने वकालत कितने समय तक की ?

उत्तर - 4-5 साल तक की | जब लायन्स ज्वाइन किया तो छूट गयी | मेरी सासु माँ ने बहुत सपोर्ट किया कि घर से बाहर जाओ, समाज के लिए कुछ करो |

प्रश्न -  कभी ऐसा नहीं लगा कि इन सामाजिक कार्यों की वजह से परिवार उपेक्षित हुआ ?

उत्तर-  कभी ऐसा नहीं लगा | देखिये शुरू में तो हम सिर्फ लायन ही बने थे लेकिन एक्टिव हुए तभी जब बच्चे अपने पैरों पर खड़े हो गये | उनकी शादी हो गई तब इसमें पूरी तरह से लगी | दो बच्चे हैं | मेरा एक लड़का राजेश स्वरुप है जो आई.डी.बी.आई. में डिप्टी जनरल मैनेजर है और एक बेटी है | दामाद प्रवीण गौड़ महुआ चैनल में चीफ  एक्जिक्यूटिव  हैं | अब घर में कोई काम ही नहीं रहता तो क्यों न वक्त समाज की भलाई में लगाया जाए | मेरा परिवार भी सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहा है |

प्रश्न - राजनीति में भी आना चाहेंगी ?

उत्तर -  राजनीति के लिए समय और पैसा  दोनों ही प्रचुर मात्रा में चाहिए | इसलिए मुझे लगता है कि इसके लिए अभी अनुपयुक्त हूँ | बाकी आगे देखिये वह तो समय के हाथ में है |

प्रश्न -  महिला होने के कारण आपको कोई विशेष संघर्ष करना पड़ा है ?

उत्तर - जी हाँ बिलकुल, संघर्ष करना पड़ा | इसीलिए मुझे यहाँ तक पहुँचने में इतना समय भी लग गया | संघर्ष तो बहुत करना पड़ा लेकिन मैंने विजय प्राप्त कर ली और इस विजय में मेरे कुछ पास्ट  डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स का भी योगदान रहा जैसे पी.सी. अग्रवाल जी,  के.एल.के. चंदानी  जी, जगदीश गुलाठी जी, मुकुंद लाल टंडन जी, संगम लाल जी इत्यादि ने बहुत सहयोग किया और मुझे हमेशा प्रोत्साहन दिया |

प्रश्न - आप महिलाओं को क्या स्थान देती हैं - वे पुरूषों से कम हैं, बराबर हैं या ज्यादा हैं ?

उत्तर -  बराबर हैं और हर मामले में बराबर हैं | महिलाएं हर वे काम कर सकती हैं जो पुरूष कर सकता है | लेकिन मेरा यह मानना है कि हमें, महिलाओं और पुरूषों को एक दुसरे से सामंजस्य बनाकर काम करना चाहिए न कि एक दुसरे के सामने खड़े होकर |

प्रश्न - आपका कोई रोल माडल ?

उत्तर -  इन्टरनेशनल डायरेक्टर नरेश अग्रवाल जी जो दिल्ली से हैं, मैं उनसे बहुत प्रेरित होती हूँ | और मुझे यह विश्वास भी है कि एक दिन वे इन्टरनेशनल प्रेसीडेंट भी जरूर बनेंगे | वे काम भी बहुत करते हैं | वे जानते हैं कि लायन्स के कार्यों में कैसे बढावा लाया जा सकता है | और वे किसी को भी मोटिवेट कर लेते हैं | सभी को सही जानकारी देते हैं | उनसे बहुत प्रेरणा मिलती है |

प्रश्न - आपके जीवन का लक्ष्य क्या है ?

उत्तर -  मेरे जीवन का लक्ष्य है लगातार आगे बढ़ते  रहना | और जीवन पर्यन्त समाज के लिए कुछ करते रहना |

प्रश्न -  आपकी नजर में हमारे देश की सबसे बड़ी समस्या और उसका निदान क्या है ?

उत्तर - मेरी नजर में जनसँख्या वृद्धि हमारे देश की सबसे बड़ी समस्या है | और लोगों में जागरूकता बढ़ाना और कड़े कानून बनाना ही इसका उपाय हो सकता है | लोगों को शिक्षित किया जाए |

प्रश्न - क्या आप जन्मजात प्रतिभा जैसी किसी चीज में विश्वास रखती हैं ?

उत्तर - जी हाँ प्रतिभा होती है और जन्मजात प्रतिभा भी होती है | लेकिन मेरा यह मानना है कि इन्सान को आगे बढ़ने  के लिए प्रतिभा के साथ-साथ किस्मत और अन्य संसाधनों का साथ मिलना भी बहुत जरूरी होता है वरना अक्सर प्रतिभावान लोग भी दौड़ में पीछे रह जाते हैं | बाकी जन्मजात प्रतिभा सबमें जरूर कुछ  न कुछ होती है | मेरे ससुर में पेंटिंग का टेलेंट था | मेरे भतीजे विकास स्वरुप में लिखने का टेलेंट था | उसे अवसर मिला तो उसका टेलेंट दुनिया के सामने भी आया |

प्रश्न - विकास स्वरुप के बारे में कुछ बताइये ?

उत्तर - विकास स्वरुप "क्यू एंड ए" नामक इन्टरनेशनल बेस्ट सेलर बुक के लेखक हैं | इसी पुस्तक पर  "स्लमडाग मिलिनियर" फिल्म बनी है जिसने ग्यारह आस्कर पुरस्कार जीते हैं | मेरी शादी के वक्त यह बहुत छोटा था | 5 साल का | बचपन से ही बहुत तेज था | प्रथम कक्षा से ही हमेशा टापर रहा | मेरे पति का बहुत दुलारा था | इसको देखते देखते  सभी बच्चे पढने में अच्छे निकाल गये | बचपन में बाबूजी (ससुर) के साथ बहुत समय बिताता था | बी.ए. के बाद पहले प्रयास में आई.पी.एस. (भारतीय पुलिस सेवा) में इसका सेलेक्शन हो गया था | लेकिन पहली पोस्टिंग अच्छी जगह न मिलने के कारण वहाँ नहीं जाना चाहता था | इत्तेफाकन आई.एफ.एस. (भारतीय विदेश सेवा) की एक सीट खाली हुई | इसे अवसर मिला | इसने तुरन्त उसे ज्वाइन कर लिया  | अब किताब लिखने के बाद नाम भी मिल गया अब तो लिखने में बहुत व्यस्त है | छुट्टियों में हिन्दुस्तान आता  है , लेकिन ज्यादा दिन के लिए नहीं |

प्रश्न - महिलाओं के लिए कोई सन्देश ?

उत्तर - महिलाएं अपनी शक्ति को पहचानें  | वे किसी भी मायने में कम नहीं हैं | आत्मनिर्भर बनें | पुरूषों का विरोध करके नहीं, उनका सहयोग लेकर सशक्त बनें |

श्रीमती पुष्पा स्वरुप के पति श्री अविनाश स्वरुप से कुछ    प्रश्न जो इलाहाबाद हाईकोर्ट में सीनियर एडवोकेट हैं -

प्रश्न - आपकी पत्नी को लायन्स क्लब में जो सफलता मिली है इससे आप कैसा महसूस कर रहे हैं ?

उत्तर -  मैं बहुत खुश हूँ |

चुनाव जीतने के बाद पुष्पा स्वरुप अपने पति श्री अविनाश स्वरुप के साथ

प्रश्न -  पुरूष प्रधान समाज में आपको कभी ऐसा नहीं लगता कि ये आपसे आगे चली जा रहीं हैं, आपसे ज्यादा ये चर्चा में हैं, आपसे ज्यादा इनका नाम हो रहा है, इससे आपमें हीन भावना नहीं आती ?

उत्तर - देखिये शुरू से ही हमारा परिवार इन चीजों के विरोध में रहा | मेरे पिताजी, माताजी उन्होंने खुद अपनी बहुओं को आगे बढ़ने,  बाहर निकलने को प्रोत्साहित किया |  पर्दा प्रथा खत्म की | तो एक ऐसे परिवार से होने के नाते कभी ऐसी सोच नहीं रही | मुझे कभी इर्ष्या नहीं होती वरन हमेशा ख़ुशी होती है |

प्रश्न - पुष्पा जी से पहले तो आप लायन बने थे जब लायन क्लब बहुत अच्छी संस्था है तब आपने क्लब क्यों छोड़ दी ?

उत्तर - मैं काफी समय लायन क्लब में सक्रिय रहा | लगभग 15 वर्ष पूर्व क्लब को छोड़ा है | मैं परम्पराओं में विश्वास रखता हूँ लेकिन लीक से हटकर कुछ नया भी करना चाहता हूँ | मेरा स्वभाव लीड करने का है पिछलग्गू बनकर कार्य  नहीं कर सकता | मुझे किसी की गलत बात बर्दास्त नहीं होती है | जब मुझे लगा कि मैं वहाँ अपने स्वभाव के अनुसार  नहीं चल सकता तो मैंने क्लब को छोड़ दिया | इसका मतलब यह नहीं है कि लायन क्लब अच्छी नहीं है |

प्रश्न - आप पुष्पा जी में क्या विशेष गुण देखते हैं ?

उत्तर -  ये विनम्र  एवं लगनशील हैं | जिस कार्य को शुरू करती हैं उसे पूरा अवश्य करती हैं | इनमें नेतृत्व का गुण जबरदस्त है | इन्हें कहना नहीं पड़ता लोग इन्हें स्वतः सहयोग देते हैं |
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इस बातचीत के दौरान जोन चेयरपर्सन लायन डा. आर.के. श्रीवास्तव भी उपस्थित रहे | इन्हें गत दिवस वर्ष 2010-11 के लिए मण्डल का डिस्ट्रिक्ट चेयरपर्सन (साइट फर्स्ट) डिस्ट्रिक्ट गवर्नर लायन के.एल.के. चंदानी (321 ई. ) के द्वारा मनोनीत किया गया है |

2 comments:

  1. आप की इस रचना को शुक्रवार, 18/6/2010 के चर्चा मंच पर सजाया गया है.

    http://charchamanch.blogspot.com

    आभार

    अनामिका

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